विश्वासी का जीवन कैसा होना चाहिए ?
विश्वास वीधि-विधानो और नियमों का पालन करना नहीं है, न ही यह केवल बुद्धि मात्र से मान लेना है कि यही ईश्वर है। यह कुछ ऐसा है जो जीवित हो, और यह सही व्यवहार में खुद को अभिव्यक्त करता हो। यह लोगों को उनकी पापमय स्वाभाव के अनुसार जीवन जीने का अधिकार नहीं देता है, बल्कि उन्हें परमेश्वर और दूसरों के लिए अधिक प्रेम की ओर निर्देशित करता है।
मसीहियत एक जिम्मेदारी है । मसीही शिक्षा लोगों की सोच और व्यवहार को बदलता है, और दैनिक जीवन की समस्याओं के लिए प्रासंगिक है। यह मनुष्यो को समाज के अधर्मी मानकों को स्वीकार किए बिना, पवित्र आत्मा की अगुवाई में परमेश्वर के लिए स्वीकार योग्य जीवन जीने में सक्षम बनाता है।
परन्तु वचन पर चलनेवाले बनो, और केवल सुननेवाले ही नहीं जो अपने आपको धोखा देते हैं।याकूब 1.22
उन बातों को सोचता रह और इन्हीं में अपना ध्यान लगाए रह, ताकि तेरी उन्नति सब पर प्रगट हो।
1 तीमुथियुस 4.15
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