अन्यभाषा क्या है? क्या अन्य भाषा बोलना चाहिए?

बाइबल पर विश्वास करनेवाले सभी मसीही जो परमेश्वर के वचन का अध्ययन करते हैं, इस बात से सहमत हैं कि अन्यभाषा का वरदान बाइबिल में मौजूद है। नए नियम में वरदानों की दो सूचियाँ दिखाई देती हैं जिनमें अन्य भाषाओं का वरदान सम्मिलित है। 1 कुरिन्थियों 12:8-11 "अनेक प्रकार की भाषा" और "भाषाओं की अर्थ" को पवित्र आत्मा के सर्वोच्च दान के रूप में कहा जाता है। 1 कुरिन्थियों 12:28-30 वरदानो की सूची में "नाना प्रकार की भाषा" दिखाई देती है।

अन्य भाषा के लिए यूनानी बाइबिल में जिस शब्द का प्रयोग किया जाता है, वह "ग्लोसोलिया" है, जो दो ग्रीक शब्दों, ग्लोसा (भाषा या बोली) और ललिया (भाषण) से बना है। इसलिए इसका अर्थ है बोलियो या भाषाओं में बोलना। ग्लोसोलॉजी मानव विज्ञान का वह विभाग है जो भाषाओं और बोलियों के अध्ययन और वर्गीकरण से संबंधित होता है। जब हमारे प्रभु ने अन्य भाषाओं के वरदान की भविष्यवाणी की (चार सुसमाचार अभिलेखों में भाषाओं का एकमात्र उल्लेख) उन्होंने कहा, 

“और विश्वास करनेवालों में ये चिन्ह होंगे कि वे मेरे नाम से दुष्टात्माओं को निकालेंगे; नई - नई भाषा बोलेंगे -- मरकुस 16.17

विशेषण "नया" का मतलब है कि वे उन भाषाओं में बात करने जा रहे थे जो उनके लिए नई थीं, यानी वे भाषाएँ जो उन्होंने उस समय तक सीखी या इस्तेमाल नहीं की थीं। अगर मैं कहता हूं कि चीनी भाषा मेरे लिए "नई" है, तो मेरा मतलब यह नहीं है कि मैं जानता ही नहीं कि ऐसी कोई भाषा होती है, बल्कि मेरे द्वारा इसका उपयोग मेरे लिए नया है क्योंकि मैं इसे न तो बोल सकता हूं और न ही इसे समझ सकता हूं। 

प्रेरितों के काम 2:4 लूका एक अलग विशेषण का उपयोग करता है जब वह कहता है, "वे अन्य भाषा बोलने लगे।" शब्द "अन्य" का सीधा सा मतलब है कि वे उस सामान्य भाषा से अलग भाषा बोलने लगे जिसका वे इस्तेमाल करते थे। प्रसंग इसकी पुष्टि करता है। सुनने वालों की ओर से आश्चर्यजनक प्रतिक्रिया पर ध्यान दें

और वे सब चकित और अचम्भित होकर कहने लगे, “देखो, ये जो बोल रहे हैं क्या सब गलीली नहीं? तो फिर क्यों हम में से; हर एक अपनी-अपनी जन्म-भूमि की भाषा सुनता है? ” -- प्रेरितों के काम 2.7-8

यहाँ "भाषा" शब्द डायलेक्टो का अनुवाद है जिससे हमारा शब्द "बोली" आया है। दो शब्द ग्लोसा (भाषा) और डायलेक्टोस (बोली) पर्यायवाची रूप से उपयोग किए जाते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिष्य अपनी मूल भाषा के अलावा अन्य ज्ञात भाषाओं में बोल रहे थे। 9-11 वचन में भाषाओं की पहचान की जाती है। यह एक चमत्कारी घटना थी जिसने शिष्यों को उन भाषाओं में बोलने में सक्षम बनाया जो उन्होंने कभी नहीं सीखी थी। 

कुछ लोग जोर देकर कहते हैं कि प्रेरितों के काम 2 में अन्य भाषाएं मानवीय भाषाएं नहीं थीं और प्रेरितों के काम 2 अपनी भाषा सुनाई देने का नहीं बल्की अपनी भाषा में सुनने का वर्णन करता है। इसका ये मतलब हुआ की जब पवित्र आत्मा के द्वारा "अन्य भाषाएँ" बोली जा रही थी, ठीक उसी समय उसी पवित्र आत्मा के द्वारा भीड़ को तुरंत अनुवादित किया जा रहा था। 

इस प्रकार, दो वरदान हो गए, अन्य भाषा में बोलने का वरदान और अविश्वासियो को अपनी भाषा सुनायी देने का वरदान ? स्पष्ट रूप से इस तरह के किसी वरदान का जिक्र बाइबिल नहीं करती। 

प्रेरितों ने लोगों को उनकी अपनी भाषा में सुसमाचार सुनाया। भीड़ चकित थी: “हम उन्हें अपनी अपनी भाषा में परमेश्वर के आश्चर्यकर्मों का वर्णन करते सुनते हैं!” (प्रेरितों 2:11)। पौलुस आश्चर्यकर्मों के वरदानों की चर्चा करते हुए कहता है, "हे भाइयो, यदि मैं तुम्हारे पास आकर अन्य भाषा बोलूं, तो तुम्हारा क्या भला होगा, यदि मैं तुम्हारे पास कोई प्रकटीकरण या ज्ञान या भविष्यवाणी या उपदेश की बातें न पहुंचाऊं। ?” (1 कुरिन्थियों 14:6)। प्रेरित पौलुस के अनुसार अन्य भाषाओं में बोलना उस व्यक्ति के लिए मूल्यवान है जो अपनी भाषा में परमेश्वर के संदेश को सुनता है, लेकिन यह बाकी के लिए कोई काम का नहीं, जब तक कि इसकी व्याख्या/अनुवाद न किया जाए।

कलीसिया की सामान्य सभाओं में बोली जाने वाली अन्य भाषा का एक भिन्न उद्देश्य प्रतीत होता है। ये वरदान जिसे पवित्र आत्मा ने कुछ लोगों को परमेश्वर की स्तुति में प्रयोग करने के लिए दिया था (1 कुर 12:10,30; 14:2)। लोगों को अन्यभाषा के दान का सार्वजनिक रूप से उपयोग केवल तभी करना चाहिए जब कोई उपासकों को सामान्य भाषा में शब्दों की व्याख्या कर सके, ताकि सभी उपस्थित लोगों को लाभ हो सके। 

यह व्यर्थ होगा यदि ऐसी अन्य भाषाओं में बोले जो कोई न समझे। इससे अच्छा तो होगा कि लोगो को उनकी ही भाषा में कुछ वचन की शिक्षा दी जाए, ताकि वे इससे सीख सकें और आत्मिक रूप से विकसित हो सकें । जैसे किसी वाद्य यंत्र को बजाने का उद्देश्य उसमें से एक धुन निकालना होता है, न कि अर्थहीन शोर करना। युद्ध के मैदान में बिगुल फूंकने का उद्देश्य सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार करने के लिए सचेत करना है। इसी तरह वाणी के साथ उद्देश्य को समझना है। 

जिन भाषाओं को कोई नहीं समझता, वे सुनने वालों के लिए उतनी ही बेकार हैं जितनी कि एक विदेशी भाषा जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं सुना। मासिहियो को उन वरदान की इच्छा करनी चाहिए जो दुसरो सिखाने और उन्हें विश्वास में मजबूत बनाने मदद करे। यदि लोगों के पास अन्य भाषाओं का वरदान है, तो उन्हें उनकी व्याख्या करने के वरदान के लिए भी प्रार्थना करनी चाहिए। उन्हें कलीसिया में दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए। यदि सुनने वाले यह नहीं समझ पाते हैं कि वक्ता क्या कह रहा है, तो वे न तो इससे लाभ उठा सकते हैं और न ही इसके लिए अपना समर्थन व्यक्त कर सकते हैं। अन्य भाषाओं के दान के लिए पौलुस आभारी है, लेकिन चर्च में वह साधारण भाषा में बात करना पसंद करता है जो सुनने वालों को निर्देश देगी और उन्हें मजबूत करेगी (1 कुर 14:18-19)।

इस कारण जो अन्य भाषा बोले, तो वह प्रार्थना करे, कि उसका अनुवाद भी कर सके। परन्तु यदि अनुवाद करनेवाला न हो, तो अन्य भाषा बोलनेवाला कलीसिया में शान्त रहे, और अपने मन से, और परमेश्वर से बातें करे। -- 1 कुरिन्थियों 14.13, 28