भक्ति और अध्ययन मार्गदर्शिका: "7 स्वभाव जिन्हें एक मसीही को अस्वीकार करना चाहिए"
पापमय जीवन की ओर ले जाने वाले जालों से कैसे बचें
📖 “तुम अपने आप को परखो कि विश्वास में हो या नहीं; अपने आप को जांचो।” – 2 कुरिन्थियों 13:5
🔷 परिचय: चरित्र का आह्वान
एक ऐसे संसार में जहाँ अहंकार, महत्वाकांक्षा और छवि को महिमा दी जाती है, वहाँ एक मसीही को धारा के विरुद्ध तैरना होता है। हमारा बुलावा केवल मसीह पर विश्वास करने का नहीं, बल्कि उसके स्वरूप में ढलने का है (रोमियों 8:29)।
हालाँकि, कुछ स्वभाव – जो समाज में सामान्य माने जाते हैं – एक मसीही के जीवन के लिए खतरनाक जाल हैं। ये गुण विनम्रता, बुद्धि, आत्मिक विवेक और भक्तिपूर्ण जीवन के शत्रु हैं। ये न केवल गलत निर्णयों की ओर ले जाते हैं, बल्कि नैतिक समझौते और अंततः सत्य से अलग जीवन की ओर धकेलते हैं।
1. Oversmartness
2. Overconfidence
3. Over excitement
4. Attitude
5. Ego
6. Hypocrisy
7. Indiscipline
🔶 1. Oversmartness/अधिक चतुराई – चालाक बुद्धि का मुखौटा
शास्त्र: “हाय उन पर जो अपनी ही दृष्टि में बुद्धिमान और अपने ही विचार में समझदार हैं।” – यशायाह 5:21
✦ मनन:
अत्यधिक चतुराई आत्मनिर्भरता से भरी हुई एक चालाकी होती है, जो परमेश्वर की ओर से मिलने वाली सच्ची बुद्धि नहीं है। ऐसे लोग दूसरों की खिल्ली उड़ाते हैं, अपने को सदा सही समझते हैं और छल में पड़ जाते हैं। यह आत्मिक अंधता और धोखे की ओर ले जाती है।
✦ प्रार्थना:
“हे प्रभु, मुझे ऊपर से मिलने वाली सच्ची बुद्धि दे—जो पवित्र, मेल करने वाली, विचारशील और विनम्र हो (याकूब 3:17)।”
🔶 2. Overconfidence/अत्यधिक आत्मविश्वास – शक्ति का भ्रम
शास्त्र: “अभिमान के पीछे विनाश होता है।” – नीतिवचन 16:18
✦ मनन:
जब आत्मविश्वास परमेश्वर की आवश्यकता को नजरअंदाज़ करता है, तो वह घातक हो जाता है। ऐसा आत्मविश्वास व्यक्ति को जल्दबाज़ी, लापरवाह बोल और परमेश्वर की इच्छा से बाहर के जोखिमों की ओर ले जाता है।
✦ बाइबल अध्ययन:
पतरस की घोषणा – “यदि मुझे तेरे साथ मरना भी पड़े, तौभी मैं तेरा इन्कार न करूंगा” (मत्ती 26:35) – परिक्षा के समय इनकार में बदल गई।
✦ प्रार्थना:
“हे पिता, मुझे केवल तुझ पर भरोसा करना सिखा, न कि अपनी ताकत और उपलब्धियों पर।”
🔶 3. Over excitement/अत्यधिक उत्साह – विवेकहीन भावना
शास्त्र: “ज्ञान के बिना जो उत्साह है, वह अच्छा नहीं।” – नीतिवचन 19:2
✦ मनन:
भावनाएं परमेश्वर की ओर से उपहार हैं, लेकिन जब निर्णय उत्साह के प्रभाव में लिए जाते हैं, तो वे जल्दबाज़ी और पछतावे की ओर ले जाते हैं। उत्साही विश्वास को भी धैर्य और आत्मा की अगुवाई में चलना चाहिए।
✦ कार्रवाई बिंदु:
किसी भी निर्णय से पहले—चाहे आत्मिक हो—प्रार्थना करें और परमेश्वर से मार्गदर्शन प्राप्त करें।
🔶 4. Attitude/रवैया – विद्रोह का बीज
शास्त्र: “विनम्रता... में वस्त्र पहनो।” – कुलुस्सियों 3:12
✦ मनन:
एक बुरा रवैया अक्सर छिपा होता है—यह व्यंग्य, हठधर्मिता या अपमानजनक व्यवहार के पीछे छिपा होता है। यह धीरे-धीरे रिश्तों को विषाक्त करता है और आत्मा को शोकित करता है।
✦ समूह चर्चा:
क्या आपका दैनिक व्यवहार, लहजा और शारीरिक भाषा मसीह की मनोवृत्ति को दर्शाते हैं?
🔶 5. Ego/अहंकार – आत्म की मूर्ति
शास्त्र: “परमेश्वर अभिमानियों का विरोध करता है, परन्तु नम्रों को अनुग्रह देता है।” – याकूब 4:6
✦ मनन:
जब हम मसीह की जगह स्वयं को केंद्र में रखते हैं, तो वह अहंकार होता है। अहंकार सुधार से इंकार करता है, प्रशंसा का भूखा होता है, और गलती स्वीकार नहीं कर पाता। यह मसीही जीवन के विरोध में है।
✦ स्व मूल्यांकन:
✔ क्या मुझे क्षमा माँगने में कठिनाई होती है?
✔ क्या मैं दूसरों से खुद की तुलना करता हूँ?
✔ क्या मैं तब जल्दी आहत हो जाता हूँ जब मेरी प्रशंसा नहीं होती?
🔶 6. Hypocrisy /पाखंड – दिखावे की बीमारी
शास्त्र: “हे कपटी लोगो! तुम सफेद की हुई कब्रों के समान हो।” – मत्ती 23:27
✦ मनन:
परमेश्वर भीतर की सच्चाई चाहता है (भजन संहिता 51:6)। पाखंड हमें दोहरा जीवन जीने वाला बना देता है—एक जो लोगों को दिखाने के लिए होता है और एक जो गुप्त होता है। असली मसीही जीवन अभिनय नहीं, बल्कि ईमानदारी है।
✦ पत्र लेखन अभ्यास:
क्या मैं दोहरा जीवन जी रहा हूँ—एक लोगों के लिए और एक छिपा हुआ?
🔶 7. Indiscipline/अनुशासनहीनता – नैतिक पतन का द्वार
शास्त्र: “आत्मा का फल... संयम है।” – गलातियों 5:22-23
✦ मनन:
प्रार्थना, उपवास, अध्ययन और आज्ञाकारिता जैसे आत्मिक अनुशासन के बिना हमारा विश्वास उथला हो जाता है। अनुशासनहीनता समझौतों, अस्थिरता और प्रलोभनों के प्रति कमजोर बनाती है।
🔷 निष्कर्ष: मसीह के स्वरूप की यात्रा
ये सात प्रवृत्तियाँ—अधिक चतुराई, आत्मविश्वास, उत्साह, रवैया, अहंकार, पाखंड और अनुशासनहीनता—आत्मिक जीवन में दीमकों के समान हैं। ये हमारी गवाही को नष्ट करती हैं, आत्मिक जड़ों को काटती हैं और परमेश्वर के उद्देश्यों से दूर ले जाती हैं।
✅ इसके स्थान पर एक मसीही को इन गुणों में बढ़ना चाहिए:
विनम्रता (फिलिप्पियों 2:3)
बुद्धि (याकूब 1:5)
धैर्य (गलातियों 5:22)
अनुशासन (1 कुरिन्थियों 9:27)
ईमानदारी (रोमियों 12:9)
परमेश्वर पर विश्वास (फिलिप्पियों 4:13)
आइए हम प्रतिदिन परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह इन सात दोषों को हमारे जीवन से दूर करे और हमें मसीह के चरित्र से परिपूर्ण करे।
📖 स्मृति वचन:
“हे परमेश्वर, मुझे जांच और मेरे मन को जान; मुझे परख और मेरी चिन्ताओं को जान ले। देख कि मुझ में कोई बुरा मार्ग तो नहीं, और मुझे अनन्त जीवन के मार्ग में चला।” – भजन संहिता 139:23-24
🛐 समापन प्रार्थना:
“हे प्रभु यीशु, मेरे जीवन से उन स्वभावों को हटा जो मेरे आत्मिक चलन में बाधा डालते हैं। मेरे भीतर के हर अभिमान, पाखंड, या लापरवाही की परतों को दूर कर। मुझे एक आदरणीय पात्र बना—विनम्र, अनुशासित और सच्चा। मेरी हर निर्णय में तेरा प्रतिबिंब झलकता रहे। यीशु के नाम में, आमीन।”
-- Dr. P Abhishek Raj

