कबाला क्या होता है ?



बारहवीं शताब्दी के बाद से यहूदी धर्म की रहस्यमय, करिश्माई और थियोसोफिक शिक्षाओं के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द, कबाला को आदम और मूसा को दिए गए रहसम्यी ज्ञान का गूढ़ और अलिखित हिस्सा माना जाता था। कबाला शब्द का अर्थ है "वह जो प्राप्त हुआ" या "परंपरा" मतलब कि कबला ज्ञान का एक निकाय था जो पीढ़ी से पीढ़ी तक मौखिक रूप से पारित हुआ था।

यह शब्द पहले मुख्यधारा के यहूदी धर्म द्वारा इस्तेमाल किया गया था, लेकिन बाद में उन लोगों के लिए आया, जो मानते थे कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों को ही पवित्रशास्त्र के "सच्चे" अर्थ के रूप में परमेश्वर की ओर से गुप्त ज्ञान दिया गया था। कबाला मनोगत प्रथाओं का उपयोग करता है और इसे एक cult माना जाता है। कबला यूना ग्नोस्टिक्स के कुछ मान्यताओं से मिलता-जुलता है, जिसमें दोनों समूहों का मानना था कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों को ही गहरी समझ या ज्ञान दिया गया था। कबला पवित्रशास्त्र की प्रेरणा को धारण करता है परन्तु पवित्रशास्त्र के स्पष्ट अर्थ की खोज नहीं करता है। "छिपा" अर्थ खोजने के लिए अंकशास्त्र जैसी चीजों का उपयोग करते है.

परमेश्वर ने पवित्रशास्त्र इस्लीये प्रदान किया ताकी मानव जाति के साथ संवाद कर सके और मानवता को अपने बारे में सिखा सके। यह स्पष्ट है कि पवित्रशास्त्र को किसी रहस्यमय तरीके से व्याख्या नहीं की जानी चाहिए। इसे पूर्ण हो चुकी भविष्यवाणी द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यीशु मसीह के पहले आगमन से संबंधित भविष्यवाणियों का पूरा होना है। यशायाह 7:14 ; 9:6 ; मीका 5:2 ; यशा 53)। यही कारण है कि बाइबिल की शाब्दिक या सामान्य रूप से व्याख्या की जानी चाहिए। 

कबला, सभी झूठे सिद्धांतों और cult (झूठे पंथ) की तरह, मसीह के ईश्वरत्व और उद्धार के एकमात्र साधन के रूप में  विश्वास की आवश्यकता को नकारता है ( यूहन्ना 14:6).